Moral Stories In Hindi For Class 3 || एक सीख ऐसी भी

Hello, friends today we are going to read a story (Moral Stories In Hindi For Class 3 ||  एक सीख ऐसी भी) about a son who learns a good lesson from his father.

So let's get started...

 एक सीख ऐसी भी

Moral Stories In Hindi For Class 3   एक सीख ऐसी भी
kids stories in Hindi


एक बार की बात हे। सूरज नाम का लड़का अपने पिता के साथ रहता था। सूरज की माँ सूरज को जनम देते हुए चल बसी थी। उसके पिता ने ही उसे माँ और बाप का प्यार देके बड़ा किया हे। समय बीतता गया और सूरज बड़ा होता गया। कुछ बर्ष बाद सूरज एक समझदार युबक बन गया। उसने अच्छे से पढाई करि और एक अच्छा नौकरी करने लगा। उसके पिता ने उसकी सादी एक सुन्दर लड़की रीता से कर दी। समय बीतता गया, सूरज अपनी पत्नी और पिता के साथ खुसी से रहने लगा।

जल्द ही सूरज की पत्नी माँ बनने वाली थी। सूरज और उसके पिता ने रीता का अच्छे से ख्याल रखा। एक दिन सूरज के पिता  ने अपने बहु और बेटे से पूछा।

तुम दोनों अपने बच्चे की परवरिश कैसे करोगे?

वो दोनों अचानक से पूछे गए इस सवाल से अछामबिट रह गए। फिर उन्होंने इस  सवाल का जवाब देते हुए कहा. - हम लोग अपने  बच्चे की परवरिस में कोई भी कमी नहीं रहने देंगे।  उसे किसी भी चीज की कभी कमी महसूस नहीं होने देंगे. किसी  परिस्थितियों से  उसे दूर रखेंगे।

उन लोगो की लोगो की बात सुनकर सूरज के पिताजी ने कुछ नहीं कहा।  अगले दिन उन्होने दो गुलाप के पौधे लेके आये और उन दोनों से कहा। "ये एक गुलाप का पौधा लो और इसे अपने बेटे की तरह देखभाल करना। ये दूसरा वाला में खुद देखभाल करूँगा।

सूरज और उसकी पत्नी ने उनके पौधे को अच्छे से लगाया।  उसमे ढेर सारा गोबर और खार डाला। और रोज दो गिलास पानी डालना शुरू किया।

उधर  सूरज के पिताजी ने अपने पौधे को ूही लगाया और उसे सिर्फ आधा ग्लॉस पानी देते थे।  ऐसे ही कुछ दिन बिट गए। सूरज और उसकी पत्नी सोचते थे की आखिर उनके पिता उन्हें इस से क्या सिख देना चाहते हे। वो सोचते थे आखिर क्यू वह  सिर्फ आधा गिलास ही पानी उस पौधे को देते हे।

कुछ दिन बाद सूरज और उसके पत्नी ने देखा की उन्होंने जो पौधा लगाया था वो अच्छे से बड़ा हो रहा हे और उसके पत्ते बड़े बड़े हो गए हे। लेकिन सूरज के पिताजी ने जो पौधा लगाया था वो थोड़ा ही बड़ा हुआ था।  वे इसे देखकर खुस थे की उनका पौधा जल्दी बड़ा हो रहा हे।

एक रात भारी बारिस और तूफान आयी। सुबह सूरज और रीता ने देखा की उनका पौधा तेज हवा की वजह से उखड गया था। लेकिन जब उन्होंने पिताजी का पौधे को देखा तो वो जैसे का तैसा खड़ा था. तेज बारिस और तूफान उसका कुछ नहीं बिगड़ पाया था। उनको कुछ समझ नहीं रहा था

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तब पिताजी ने कहा : तुमलोगो ने अपने पौधे को बोहोत सारा पानी और खर दिया जिसके वजह से वो जल्दी से बड़ा तो हो गया लेकिन पानी और खाद बाहर से ही मिलने  वजह से उसे ज्यादा म्हणत नहीं करना पड़ा और उसके जड़े ज्यादा मजबूत नहीं बने जिसकी वजह से तूफान ने उसे उखड दिया।

इस से  तुमलोगो को ये सीख  देना चाहता  हु की कभी भी अपने बच्चे को हद से ज्यादा प्यार अच्छा नहीं होता।  उसकी परवरिस ऐसी होनी चाहिए की उसे हर बुरे से बुरे परिस्थितियों से उसे लड़ने में सक्षम बनाये।


A Learning

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Moral Stories In Hindi For Class 3   एक सीख ऐसी भी
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Once upon a time. A boy named Suraj lived with his father. Suraj's mother passed away giving birth to Suraj. His father has grown up giving him the love of his mother and father. Time passed and the sun grew larger. After a few years, Suraj became a sensible young man. He studied well and started doing a good job. His father gave him a beautiful girl Rita. As time went on, Suraj started living happily with his wife and father.

Soon Suraj's wife was about to become a mother. Suraj and his father took good care of Rita. One day Suraj's father asked his daughter-in-law and son.

How will you both raise your child?

Both of them were suddenly surprised by this question asked. Then he said while answering this question. - We will not allow any reduction in our child care. He will never let me miss anything. Will keep him away from any circumstances.

Suraj's father did not say anything after hearing those people. The next day he brought two slavery plants and told them both. "Take this plant of a Rose and take care of it like your son. I'll take care of myself in the other one.

Suraj and his wife planted their plant well. Put a lot of cow dung and Khar in it. And started pouring two glasses of water daily.

On the other hand, Suraj's father planted his plant and gave him only half a glass of water. A few days passed like this. Suraj and his wife wondered what their father wanted to teach them from this. He used to think that why he gives only half a glass of water to that plant.

A few days later, Suraj and his wife saw that the plant they had planted was growing well and its leaves had grown. But the plant that Suraj's father had planted had grown only slightly. They were happy to see that their plant was growing quickly.

One night heavy rain and storm came. In the morning Suraj and Rita saw that their plant was uprooted due to the strong wind. But when they saw Dad's plant, he stood like a tit. The sharp rain and storm had not deterred him. They could not understand anything

Then the father said: You gave your plant a lot of water and food, due to which it quickly grew, but due to water and manure from outside, he did not have to drink much and his roots did not become strong. Because of this, the storm uprooted him.

With this, I want to teach you that never too much love for your child is good. His care should be such that he should be able to fight against every bad situation.


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